Purnagiri Temple की मान्यताएं क्या हैं और यहाँ कैसे पहुंचें ?

इस आर्टिकल में माँ पूर्णागिरी मन्दिर (Purnagiri Temple Tanakpur) के इतिहास, मन्दिर की स्थापना तथा मन्दिर से जुडी पौराणिक कथाओं के बारे में बताया जाएगा, यदि आप माँ पूर्णागिरी मन्दिर से सम्बंधित सभी बाते जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें|

पूर्णागिरी मन्दिर की स्थापना

जब भगवान् शिव तांडव करते हुए यज्ञ कुंड से माता पार्वती के मृत शरीर को आकाश गंगा मार्ग से लेकर जा रहे थे तो भगवान् विष्णु ने भोलेनाथ का तांडव देखते हुए उन्हें रोकने के लिए माता पार्वती के मृत शरीर के टुकड़े कर दिए, जो आकाश मार्ग से पृथ्वी के विभिन्न स्थानों में जाकर गिरे | जिस- जिस स्थान पर देवी के अंग गिरे वह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गए | माता सती का “नाभि” अंग चम्पावत जिले के पूर्णा पर्वत पर गिरने से वहां “माँ पूर्णागिरी मन्दिर” की स्थापना हुई | इसी दौरान माता पार्वती के नेत्र उत्तराखंड राज्य  के  नैनीताल  जिले में गिरे थे और वहां  “नैना देवी मन्दिर” का निर्माण हुआ |

देश की चारों दिशाओं में स्थित मल्लिका गिरी ,कालिका गिरी ,हमला गिरी तथा पूर्णागिरी में से पूर्णागिरी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त हुआ है |

पूर्णागिरी मन्दिर (Purnagiri Mandir) की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार यहाँ पर एक सोने का पर्वत हुआ करता था और कहा जाता है कि यह सोने का पर्वत तब बना था जब महाभारत काल में प्राचीन भ्रम्कुंड के निकट पांडवों द्वारा देवी भगवती की आराधना तथा भ्रमदेव मंडी में भ्रम्मा द्वारा विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया था|

सन 1632 में कुमाँउ के राजा ज्ञान चंद के दरवार में गुजरात से पहुंचे इस देवी स्थल की महिमा स्वपन में देखने पर उन्होंने यहाँ मूर्ती स्थापित करवाई थी |

Purnagiri Temple की मान्यताये [Beliefs of Purnagiri Temple]

पूर्णागिरी मन्दिर में स्थित “झूठे का मन्दिर” की कहानी 

पौराणिक कथा के अनुसार एक संतान विहीन के स्वपन में आकर माता ने कहा कि मेरे दर्शन के बाद ही तुम्हे संतान (पुत्र) की प्राप्ति होगी | सेठ ने माँ पूर्णागिरी के दर्शन किये और कहा अगर मुझे पुत्र की प्राप्ति हुई तो वह देवी के लिए सोने का मन्दिर बनवायेगा |

पुत्र प्राप्ति के बाद सेठ अपनी बात से मुकर गया और उसने सोने का मन्दिर न बनवाकर ताम्बे का मन्दिर बनवाया और उसमे सोने की पोलिश चढ़वाकर देवी को अर्पित करने के लिए जाने लगा तो “टुन्याश” नामक स्थान पर पहुंचकर वह ताम्बे के मन्दिर को आगे नहीं ले जा सका था तब सेठ को उस मन्दिर को उसी स्थान पर रखना पड़ा था | तब से वह मन्दिर पौराणिक काल से वर्तमान समय तक “झूठे का मन्दिर” नाम से जाना जाता है|

सिद्ध बाबा मन्दिर की कथा 

पूर्णागिरी के सिद्ध बाबा के बारे में यह कथा है कि एक बार एक साधू व्यर्थ में ही माँ पूर्णागिरी के उच्च शिखर पर पहुँचने की कोशिश कर रहा था तब माता पूर्णागिरी ने उसे नदी में गिरा दिया था | मगर दयालु माता ने इस संत को आशीर्वाद दिया और सिद्ध बाबा के नाम से विख्यात कर दिया और कहा कि मेरे दर्शन के बाद सिद्ध बाबा के दर्शन करने पर ही भक्त की मनोकामना पूर्ण होगी | इसलिए माँ पूर्णागिरी के दर्शन करने के बाद भक्तगढ़ सिद्ध बाबा मन्दिर के दर्शन के लिए अवश्य पहुँचते हैं | कुमाऊ के लोग सिद्ध बाबा के नाम से मोटी रोटी बनाकर सिद्ध बाबा को भेंट स्वरुप चढाते हैं |

About Purnagiri Temple in Hindi [पूर्णागिरी मन्दिर]

“पूर्णागिरी मन्दिर” उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जिले में स्थित है | यह मन्दिर चम्पावत में बह रही काली नदी के दायीं तरफ है | टनकपुर से 19 किलोमीटर दूर यह शक्तिपीठ माँ भगवती के 108 सिद्धपीठों में से एक है | पूर्णागिरी मन्दिर अन्नपूर्णा चोटी के शिखर पर समुद्रतल से लगभग 3000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है | देश की चारों दिशाओं में स्थित मल्लिका गिरी ,कालिका गिरी ,हमला गिरी तथा पूर्णागिरी का यह शक्तिपीठ सर्वोपरि महत्त्व रखता है और इस शक्तिपीठ में वर्ष भर लोग पूजा के लिए आते हैं |

How To Reach Purnagiri Temple [पूर्णागिरी मन्दिर कैसे पहुचें] ?

 How to reach Maa Purnagiri temple by train [Purnagiri Temple Route]

पूर्णागिरी पहुँचने के लिए आपको टनकपुर आना होगा | टनकपुर रेलवे स्टेशन देश के लगभग सभी मुख्य रेलवे स्टेशन के साथ जुड़ा हुआ है | टनकपुर रेलवे स्टेशन इस क्षेत्र का अंतिम स्टेशन है | यहाँ पहुँचने के बाद कुछ दूरी तक आप टेक्सी से जा सकते है ,किन्तु माँ पूर्ण गिरी के दर्शन के लिए आपको पैदल यात्रा करनी पड़ती है |

Tanakpur to Maa Purnagiri temple by road

टनकपुर शहर नोर्थ इंडिया के लगभग सभी शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है | ISBT आनंद विहार, दिल्ली तथा ISBT देहरादून से आप बहुत ही आसानी से यहाँ साधारण बसों तथा AC बसों द्वारा पहुँच सकते हैं |

Official Website of Purnagiri Temple

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