Rakhi 2022 – Special Event for all Hindu’s (Don’t miss out)

Rakhi 2022 : भाई-बहन के रिश्ते का पवित्र त्यौहार जिसे रक्षाबंधन के नाम से जाना जाता है बड़े ही धूमधाम से सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है | इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधकर तिलक लगाते हुए उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन लेते हैं और उन्हें तरह-तरह के उपहार भी देते हैं | इस लेख में Rakhi 2022 के बारे में यह बताया जाएगा कि 2022 रक्षाबंधन कब है या किस दिनांक में बहने अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधेंगी |

रक्षाबंधन 2022

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Rakhi 2022 Highlight 

  • रक्षाबंधन तिथि : 11 अगस्त 2022
  • शुभ मुहूर्त : सुबह 9 बजकर 28 मिनट से सायं 9 बजकर 14 मिनट
  • भद्रकाल का समय : सायं 5 बजकर 17 मिनट से रात्रि 8 बजे तक (प्रयास करें कि इस दौरान राखी ना बांधें)

रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त 2022

यूं तो रक्षाबंधन 2022 के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 9 बजकर 28 मिनट से सायं 9 बजकर 14 मिनट तक का है किन्तु ज्योतिषों के अनुसार इस दौरान भद्रकाल भी बताया गया है जो कि 11 अगस्त दिन गुरुवार को शाम 5 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगा | इसके बाद भद्रा मुख शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा और रात 8 बजे तक रहेगा | इसलिए प्रयास यह करें कि भद्रकाल के समय को छोड़कर ही राखी बांधें |

rakshabandhan 2022

रक्षाबंधन तिथि – 11 अगस्त 2022, गुरुवार

पूर्णिमा तिथि आरंभ – 11 अगस्त, सुबह 10 बजकर 38 मिनट से

पूर्णिमा तिथि की समाप्ति – 12 अगस्त. सुबह 7 बजकर 5 मिनट पर

शुभ मुहूर्त – 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 28 मिनट से रात 9 बजकर 14 मिनट

अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक

अमृत काल – शाम 6 बजकर 55 मिनट से रात 8 बजकर 20 मिनट तक

जानिए रक्षाबंधन के दिन कब रहेगा भद्राकाल का साया ?

पंचांग के अनुसार, भद्रा पुंछ 11 अगस्त दिन गुरुवार को शाम 5 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और शाम 6 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगा | इसके बाद भद्रा मुख शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होगा और रात 8 बजे तक रहेगा |  इस दौरान भद्रकाल के समय भाई को राखी न बांधें और भद्राकाल के खत्म होने पर ही राखी बांधें | 

भद्राकाल में क्यों ना बांधें राखी ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की बेटी थी और शनिदेव की बहन थीं | कहा जाता है कि जब भद्रा का जन्म हुआ तो वे पूरी सृष्टि में तबाही मचाने लगीं और वो सृष्टि को निगलने वाली थी | जहां पर भी कोई पूजा-पाठ, अनुष्ठान, यज्ञ और मांगलिक कार्य होता था भद्रा वहां पर पहुंच कर उसमें रुकावट पैदा करने लगती थीं | इस कारण से भद्रा को अशुभ माना गया है और भद्रा काल के लगने पर राखी या किसी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है |

 

रक्षाबंधन 2022 : जान लें राखी बांधने का सही तरीका

  • सुनिश्चित करें कि राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व दिशा में हो
  • बहने अपनी पूजा की थाली में चावल, रोली, रक्षासूत्र तथा जला हुआ दीपक रखें
  • बहने भाई को तिलक लगाते समय अनामिका ऊँगली का प्रयोग करें
  • तिलक के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगायें और राखी बांधें
  • इसके बाद भाई की आरती उतारते हुए उनकी लम्बी आयु के लिए मंगलकामना करें

उत्तराखंड में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है यह पर्व

वैसे तो रक्षाबंधन का त्यौहार सम्पूर्ण भारत में बहुत हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है किन्तु उत्तराखंड (देवभूमि) में यह पर्व बस भाई बहनों के प्यार तक सीमित नहीं रहता यहाँ पर पुरोहित तथा जजमान आपस में एक दूसरे को रक्षासूत्र बांधते हैं और एक दूसरे के कल्याण और उन्नति की कामना करते हैं | रक्षाबंधन के इस पवित्र त्यौहार के दिन उत्तराखंड में पेंड़ों को भी राखी बाँधी जाती है, क्योंकि प्रकृति भी जीवन की रक्षक है और पेंड पौधे प्राकृतिक आपदाओं से मनुष्यों की रक्षा करने में सहायक होते हैं |

रक्षाबंधन का महत्त्व

महाभारत काल से ही रक्षाबंधन का बहुत महत्त्व है, महाभारत के अनुसार एक बार श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लग गयी थी और माता द्रौपदी ने अपनी साडी का पल्लू फाड़कर कृष्ण के हाथ पर बांधकर उनका उपचार किया था और उसी समय श्रीकृष्ण ने उनकी जीवन भर रक्षा करने का वचन दिया था और कहा जाता है कि तब से ही पवित्र त्यौहार मनाया जाता है |

एतिहासिक कथा के अनुसार एक बार चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने संकट के समय राजा हुमायूँ को रक्षासूत्र भेजा था और उनसे अपनी रक्षा का वचन लिया था | इस रक्षा धागे का सम्मान रखते हुए हुमायूँ ने युद्ध के दौरान रानी कर्णावती की रक्षा गुजरात के राजा से की थी, उसके बाद प्रत्येक वर्ष रानी कर्णावती हुमायूँ को रक्षासूत्र भेजा करती थी और रक्षाबंधन की यह परम्परा प्रारम्भ हो गयी थी |

Conclusion

Rakhi 2022 का निष्कर्ष त्याही है कि समय के अनुसार ही राखी बांधें और प्रयास करें कि भद्रकाल के समय में आप अपने भाइयों को राखी ना बांधे क्योंकि भद्रकाल के समय को अशुभ माना जाता है |

उम्मीद करते हैं कि Rakhi 2022 से सम्बंधित उपरोक्त जानकारी आपको पसन्द आई होगी और आपको आपके सवाल का जबाब मिल गया होगा, यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो आपसे गुजारिश है कि इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें |

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