Dashara 2021: क्यों मनाया जाता है विजया दशमी का त्यौहार, जानिये महत्त्व एवं शुभ मुहूर्त

बुराई पर अच्छाई की जीत के पावन पर्व दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, यह हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक त्यौहार है | इस पर्व का आयोजन अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को किया जाया है और बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है | आज के आर्टिकल में दशहरा से सम्बंधित विशेष प्रकार की जानकरियों जैसे दशहरा क्या है, दशहरा कब है, दशहरा क्यों मनाया जाता है तथा  दशहरा का महत्त्व क्या है इत्यादी विषयों पर चर्चा की जायेगी | यदि आप दशहरा (Dashara 2021) से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को अन्त तक जरूर पढ़ें |

दशहरा क्या है ?

बुरे आचरण पर अच्छे आचरण की जीत या फिर कहें रावण पर भगवान् राम की जीत का जश्न दशहरा के रूप में मनाया जाता है और इसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है | इस तिथि को भगवान् राम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत प्राप्त की थी |

दशहरा का यह पर्व क्यों मनाया जाता है इससे सम्बंधित कई कल्पनाओं ने भी जन्म लिया है, जैसे कुछ लोगों का मानना है कि दशहरा का सम्बन्ध कृषि से है क्योंकि इस समय एक किसान अपने द्वारा मेहनत से पैदा की गयी फसल को अपने घर लाता है और वह बहुत प्रसन्न होता है तथा ख़ुशी जाहिर करने के लिए विजयादशमी का त्यौहार मनाता है |

इसके अलावा भी दशहरा के त्यौहार से सम्बंधित कई कल्पनाएँ है और इस त्यौहार को अपने अपने हिसाब से बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है |

दशहरा कब है (Dashara 2021 Date), शुभ मुहूर्त (Vijayadashmi Muhurat) ?

हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष (Dashara 2021) दशहरा का पवित्र त्यौहार 15 अक्टूबर 2021 को मनाया जाएगा (dashara kab hai 2021) | इस दिन खुशी को जाहिर करने के लिए जगह- जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है जिनमें लाखों लोग इन मेलों का हिस्सा बनते हैं |

विजयादशमी के शुभ मुहूर्त से सम्बंधित यह जानकारी प्राप्त हो पायी है कि वर्ष 2021 में शुभ मुहूर्त (vijaydashmi muhurat) 15 अक्टूबर 2021 को दोपहर 2 बजकर 2 मिनट से 2 बजकर 48 मिनट तक रहेगा |

यह भी जानिये : रक्षाबंधन 2021 – मुहूर्त देखकर बांधें भाई की कलाई में राखी

क्यों मनाया जाता है दशहरा का पर्व ?

त्रेता युग में भगवान् विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रूप में नया जन्म लिया था और रावण का वध किया था | रावण ज्ञानी होने के साथ साथ बहुत ही घमंडी तथा क्रूर था और सम्पूर्ण धरती में अपना स्वामित्व चाहता था जो कि धरती के विनाश का कारण बन सकता था | इसी को रोकने के लिए भगवान् विष्णु को श्री राम के रूप में अवतार लेना पड़ा था |

इसी त्रेता युग में भगवान् राम ने रावण का वध करके सम्पूर्ण धरती का विनाश होने से बचा लिए और बुराई पर अच्छाई की जीत हुई | रावण के वध के बाद जनमानस अत्यधिक प्रसन्न हुआ और अपनी ख़ुशी को जाहिर करने के लिए लोग दशहरे का त्यौहार मनाने लगे |

इस दिन अपनी खुशी को जाहिर करने के लिए बड़े मेलों तथा रामलीला का आयोजन कर उसमें रावण का बड़ा पुतला जलाया जाता है, यह शुभ कार्य रामलीला में भगवान राम की भूमिका निभा रहे कलाकार द्वारा किया जाता है |

दशहरा का महत्त्व एवं इतिहास

रामायण काल में हुए रावण तथा राम के बीच युद्ध का नतीजा यह था कि भगवान राम ने रावण का वध कर बुराई को हराकर अच्छाई पर जीत प्राप्त करी थी, इसलिए उसके बाद से प्रत्येक वर्ष लोगों द्वारा अपनी खुशी को जाहिर करने के लिए दशहरा का त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है |

जैसा कि ऊपर बताया गया है कि दशहरा क्यों मनाया जाता है से सम्बंधित कई कल्पनाओं ने जन्म लिया है, उन्ही में से एक कल्पना के अनुसार यह कथा है कि भगवान् राम ने रावण का वध किया था इसलिए दशहरा का त्यौहार मनाया जाता है | यदि इससे सम्बंधित कहानी की बात की जाए तो कहानी प्रारम्भ श्री राम तथा उनके भाइयों तथा पत्नी सीता के साथ वनवास से प्रारम्भ होती है |

माँ को दिए गए वचन को निभाने के लिए भगवान् राम, माता सीता तथा लक्ष्मण 14 वर्षों के वनवास पर चले गए थे जहाँ पर उन्हें तरह तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था | भगवान् राम का मन अत्यधिक पवित्र तथा हृदय अति कोमल था इसलिए उनकी सेवा में उनके सेवक हमेशा तैयार रहते थे |

इनके वनवास के समय लंका साम्राज्य का राजा रावण हुआ करता था और वह बहुत ज्ञानी था किन्तु उसके घमंड ने उसे इंसान से राक्षस प्रकृति का बना दिया था | रावण ने अपने साम्राज्य के साथ साथ आस पास भी आतंक मचा रखा था इसलिए उसका सर्वनाश आवश्यक था और भगवान् विष्णु ने रावण के संहार के लिए ही भगवान् राम का रूप धारण किया था |

वनवास के चलते ही एक बार रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था और यह उसकी सबसे बड़ी भूल थी | माता सीता को बचाने के लिए भगवान् राम ने हनुमान तथा अन्य लोगों की सहायता से लंका का सर्वनाश कर दिया और लंकापति रावण का वध कर दिया था |

तभी से रावण के पुतले को प्रतिवर्ष दशहरे (Dashara 2021) के दिन जलाया जाता है और यह माना जाता है कि रावण के पुतले के साथ साथ मनुष्य के अन्दर के बुरे इंसान को भी जलाया जा रहा है इसलिए जगह जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है जहाँ लाखों लोग एक साथ एकत्रित होकर यह पर्व मानते हैं |

दशहरा पर निबंध 

उम्मीद करते हैं कि दशहरा (Dashara 2021) से सम्बंधित उपरोक्त जानकारी आपको पसन्द आई होगी, हमारी अपने पाठकों से बस यही गुजारिश है कि इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि अधिक से अधिक लोग इस पर्व की मान्यता, महत्त्व एवं इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें |

भारत के त्यौहार, टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर, बायोग्राफी, रोचक तथ्य तथा how to queries इत्यादि से सम्बंधित जानकारियों के लिए explanation in हिन्दी visit करें |

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